बोइस लॉकर रूम का मामला : दिल्ली पुलिस ने एक स्कूली बच्चे को पकड़ा, पुलिस ने की इंस्टग्राम चैट की जाँच।

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3 मई को, साउथ दिल्ली से चल रहे “बोइस लॉकर रूम” नामक निजी चैट समूह के कुछ स्क्रीनशॉट सामने आए और इस ग्रुप को चला रहे स्कूली बच्चो के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की मांग की जा रही थी जैसे की इस ग्रुप में बच्चे यौन हिंसा पर चर्चा कर रहे थे साथ ही कम उम्र की लड़कियों की तस्वीरें साझा करते हुए पाये गए थे।

इसके बाद, साइबर एक्सपर्ट शुभम सिंह इस मामले मैं सामने ए जिसके बाद दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने एक FIR दर्ज की।

डीसीपी अनीश रॉय ने इंडियन एक्सप्रेस ने के हवाले से कहा :

“हमें जैसे पता चला उसके बाद, हमने धारा 465 (जालसाजी), 471 (एक जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में उपयोग ), 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जालसाजी), 509 (अधिनियम के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की महिला का अपमान करना ) और धारा 67 (आईटी इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री को प्रकाशित करना या प्रसारित करना) और आईटीए अधिनियम की 67A (इलेक्ट्रॉनिक रूप में यौन स्पष्ट अधिनियम वाली सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण) के तहत मामला दर्ज कियाव् और हम इस मामले की जांच करने के लिए साक्ष्य एकत्र कर रहे हैं।”

इसके अलावा, दक्षिण दिल्ली के एक स्कूल के अधिकारियों ने साकेत पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने इंस्टाग्राम ग्रुप चाट पर पुलिस को नोटिस जारी किया। सोर्स : हिंदुस्तान टाइम्स।

न्यूज़ 18 से बातचीत मैं अधिकारी ने बताया “उनकी शिकायत में, स्कूल अधिकारियों ने पुलिस से घटना की जांच करने का अनुरोध किया। पुलिस ने तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए, 15 वर्षीय बच्चे की पंजीकृत संख्या प्राप्त की, जिसने कथित तौर पर समूह पर एक तस्वीर साझा की थी। उसका फोन स्विच ऑफ था। उसका पता खोजने के बाद, उसे सोमवार शाम को पकड़ लिया गया।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस निजी ग्रुप में 3-4 अलग-अलग स्कूलों के 21 सदस्य थे और कुछ कॉलेजों के थे। एक अन्य अधिकारी ने बताया ,
“हमने नाबालिग बच्चो से पूछताछ की है और उन्होंने बताया कि वे अपने सहपाठियों की तस्वीरें नहीं बल्कि इंस्टाग्राम पर रैंडम सार्वजनिक खातों की तस्वीरें देख रहे थे। उन्होंने कहा कि वे समूह के कई लोगों को नहीं जानते थे क्योंकि वे अन्य स्कूलों से थे। कथित समूह के स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद, समूह को हटा दिया गया और एक दूसरा ग्रुप बनाया गया जिसका नाम ‘लॉकररूम 2.0’ रखा गया, जिसमें लड़कियों को भी जोड़ा गया था। हम लोगो ने स्नैपचैट पर कुछ बातचीत भी कर चुके हैं। ”

इस प्रकार पुलिस ने अपना पहला कदम उठाया और हमे लगता है सही तरीके से इस पर जाँच की जाएगी।

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