एक वयक्ति ने लकड़ी की गाड़ी के सहारे अपने परिवार के साथ हैदराबाद से बालाघाट का सफर तय किया।

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जब कोई ऐसे सवाल पूछते हैं की ये मजदुर पैदल क्यों चल रहे, जो शायद सामान्य परिस्थितियों में पूछे जाएं तो ठीक लग सकते हैं. लेकिन भूखे-प्यासे-बेघर कई सौ किलोमीटर अपने घर पैदल जाने को मजबूर मज़दूरों की परिस्थितियों के लिए नहीं.

आज कल ऐसे कई खबरे आप लोग पढ़ रहे होंगे जिसमे मजदुर पैदल घर जा रहे है। हम भी आपको बताते हैं एक मजबूर परिवार की कहानी जो हैदराबाद गया था अपनी रोजी – रोटी के लिए। लॉकडाउन होने की वजह से ना तो उसके पास खाना था न ही पैसे, फिर वो क्या करता । इस परिवार मैं गर्भवती महिला उसकी एक छोटी सी बच्ची और उसका पति। फिर इन्होने एक लकड़ी की गाड़ी बनाई और फिर शुरू किया अपना सफर।

ANI की रिपोर्ट

मध्य प्रदेश: हैदराबाद से बालाघाट जिले तक की यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने अपनी बेटी और गर्भवती पत्नी को एक लकड़ी की गाड़ी पर चढ़ाया। उनकी पत्नी कहती हैं, “हम 17 मार्च को हैदराबाद पहुंचे। जब हमारे पैसे और खाने ख़तम हो गया फिर , मेरे पति ने गाड़ी बनाई और हमने शहर छोड़ दिया”।

अब आप ही बताये इन् मजबूरो को क्या करना चाहिए

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