सुप्रीम कोर्ट ने कहा हवाई उड़ानों मैं मिडिल सीट की बुकिंग नहीं की जानी चाहिए, सरकार लोगो के स्वास्थ्य के बारे मैं चिंता करे।

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अभी कुछ दिनों पहले ही केंद्र सरकार ने देश भर में घरेलू हवाई यात्रा को फिर से शुरू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। जबकि दिशा-निर्देश हवाई अड्डों मैं सोशल डिस्टन्सिंग को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं, लेकिन वही ये गाइड लाइन ने उड़ानों के बारे में कुछ नहीं कहा हैं । इसका मतलब जब हम फ्लाइट्स की सफर करते हैं तो सोशल डिस्टन्सिंग को मेन्टेन करने के लिए मिडिल सीट को खाली रखना जरुरी हैं।

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सोर्स : गूगल

दिल्ली मैं उच्चतम न्यायालय ने आज इस मामले को संज्ञान में लिया और एयर इंडिया को आदेश दिया कि वह कुछ समय के लिए विदेश में फंसे भारतीयों के लिए चलाई जा रही अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर बीच की सीटों के लिए अग्रिम बुकिंग न ले। इसने एयरलाइन को 6 जून तक केवल 10 दिनों के लिए पूरी क्षमता के साथ बुक करने की अनुमति दी है।

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सोर्स : गूगल

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे HC के आदेश कि एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एयर इंडिया को विदेश में फंसे भारतीयों को उड़ाने के दौरान बीच की सीटें खाली रखने का आदेश दिया गया था।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा:

कम से कम छह फीट की सामाजिक दुरी होनी चाहिए, और आपके फ्लाइट्स के अंदर आप सीट कैसे बुक कर सकते हैं।

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सोर्स : गूगल

जब सरकारी वकील ने तर्क दिया कि चिकित्सा और विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि बीच की सीटें खाली रखने से विमान में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, सीजेआई बोबडे ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया:

आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह किसी को प्रभावित नहीं करेगा? क्या वायरस को पता चल जाएगा कि यह विमान में है और इसे संक्रमित नहीं करना है?

अदालत ने कहा हैं की घरेलू उड़ानों जो की 25 मई शरू की गई हैं उसमे भी ये रूल्स को लागु किया जाना चाहिए।

अब ये साफ़ हो गया की सोशल डिस्टन्सिंग को फॉलो कतरते हुए ही हवाई उड़ने शरू होनी चाहिए।

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